रोजगार में सुधार का दौर एक बार फिर से खत्म?

नई दिल्ली  |कोरोना महामारी के इस दौर में बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश में अक्तूबर महीने के बाद नवंबर में भी बेरोजागरी बढ़ी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में रोजगार में 0.9 फीसदी की गिरावट आई जिसके चलते लगभग 35 लाख लोगों की नौकरियां खत्म हो गई।

अक्तूबर में भी रोजगार में 0.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। बेरोजगारी में अक्तूबर की तुलना में ज्यादा तेजी आने से एक बार फिर से चिंता बढ़ गई है कि रोजगार में सुधार का दौर एक बार फिर से खत्म हो गया है और बेरोजगारी बढ़ सकती है। हालांकि, सीएमआईई ने कहा है कि दिसंबर में गिरावट का यह ट्रेंड खत्म हो सकता है क्योंकि नवंबर के आखिरी और दिसंबर के पहले सप्ताह के दौरान श्रम भागीदारी में थोड़ा इजाफा दिखा था। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने 39.3 करोड़ लोग रोजगार में थे, लेकिन यह पिछले साल की इस अवधि में 2.4 फीसदी की गिरावट है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में अच्छी रिकवरी के बावजूद मार्च, 2020 से रोजगार में लगातार गिरावट का ट्रेंड है। मार्च 2020 के बाद से हर महीने इसके पिछले साल की तुलना में रोजगार में गिरावट दर्ज की गई है। रोजगार इन महीनों में कहीं से भी पिछले साल के स्तर पर नहीं पहुंचा है।

सीएमआईई का कहना है कि नौकरी की कमी के कारण लोग हतोत्साहित हो रहे हैं और श्रम बाजार से बाहर होते जा रहे हैं। काम का परिदृश्य बेहतर नहीं होने से निष्क्रिय बेरोजगारों (काम करने में दिलचस्पी नहीं रखने वाले) की संख्या बढ़कर नवंबर में 22.5 मिलियन पहुंच गई जो 2019-20 के औसतन 11.6 मिलियन से लगभग दोगुनी है। इसके चलते श्रम बल (नियोजित और बेरोजगार जो सक्रिय रूप से काम की तलाश में हैं) लगभग 16 मिलियन सिकुड़ गए हैं। इसके चलते 2019-20 में जहां कुल श्रम बल 43.7 करोड़ था वह कम होकर नवंबर 2020 में 42.1 करोड़ रह गया।

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ान मे मदद मिलेगी। विशेषज्ञों और अर्थशास्तियों ने यह बात कही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 22,810 करोड़ रुपए की लागत से शुरू की रोजगार योजना से देश के 58.5 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। साथ ही कोरोना से बुरी तरह प्रभावित अतिथ्य उद्योग, पर्यटन, मैन्युफैक्चिरंग, लाइफस्टाइल, संगठित खुदरा बाजार जैसे क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी। इस योजना से इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन में फिर से मदद मिलेगी।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि नई नियुक्ति करने पर पीएफ मद में मदद से एसएमई और कम आय वर्ग के कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। कोरोना के कारणा सबसे अधिक नुकसान छोटे कारोबारियों को उठाना पड़ा है। वहीं, कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज गति से सुधार हो रहा है। ऐसे में मांग निकलने से जॉब बाजार में खुद से तेज गति से सुधार होगा।

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