गुलाबी महिलाओं ने नर्सरी लगाकर कायम की महिला सशक्तिकरण की मिसाल

गोंडा। महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी गुलाबी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने गांव में ही रोजगार के ऐसी संसाधन विकसित किए हैं, जिससे एक तरफ जहां पर्यावरण को हरा-भरा बनाने में अहम्भू मिका निभा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ विभिन्न प्रकार के पौधे बेचकर समूह की महिलाएं मालामाल हो रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहा गुलाबी महिला समूह 
 जनपद के विकास खंड इटियाथोक की ग्राम पंचायत बिन्होनी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहे गुलाबी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने पौधे की नर्सरी लगाकर विभिन्न प्रजाति के करीब 15 हजार पौधे तैयार किए हैं। इनमें सागौन, आम, महुआ अमरूद, यूकेलिप्टस, जैसे पौध तैयार हैं।
सरकार के वृक्षारोपण अभियान में सहायक है ये समूह
 ग्राम पंचायत व सरकार द्वारा चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियान में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी नर्सरी से पौधे की सप्लाई कर रही हैं। संबंधित विभाग द्वारा इन्हें 23 रूपये प्रति पौधे की दर से भुगतान किए जाने का प्रावधान है। जबकि नर्सरी से आम लोग भी पौधों की खरीद कर रहे हैं। जिससे महिलाएं अच्छा खासा मुनाफा कमा रही हैं। नर्सरी के साथ-साथ इन महिलाओं द्वारा कोरोना से बचाव के लिए मास्क बनाने का भी काम किया जाता है।
लॉक डाउन में बनाये 5000 फेस मास्क
स्वयं सहायता समूह की महिला सीता देवी ने बताया कि पहले हमलोग सिलाई का काम करते थे, बच्चों के लिए ड्रेस बनाते थे। देशभर में लॉक डाउन लगने के बाद एक मीटिंग में हम लोगों को मास्क बनाने के लिए प्रेरित किया गया। करीब 5 हजार मास्क बनाकर बिक्री किया। इसके बाद हम लोगों ने एक बैठक कर नर्सरी लगाने का प्लॉन तैयार किया। उसके बाद करीब 15 हजार पौध हम लोगों द्वारा तैयार किया गया। अब हमारी नर्सरी से ग्राम पंचायत सहित अन्य ग्राम पंचायतों से पौध के ऑर्डर मिल रहे हैं। नर्सरी से हमें अच्छा खासा मुनाफा मिलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। बताया कि सरकार द्वारा 23 रूपये प्रति पौध के हिसाब से भुगतान भी किया जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया
 इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया किस जनपद में करीब 10 स्वयं सहायता समूह विशेष रूप से सक्रिय हैं। उनको नर्सरी डालकर पौध तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया था। 10 स्वयं सहायता समूह द्वारा करीब 4 लाख पौधे तैयार किए गए। नर्सरी से सरकारी विभागों के अलावा आम लोग भी पौध खरीद कर ले जा रहे हैं। जिससे स्वयं सहायता समूह आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। इन लोगों से प्रेरणा लेकर कुछ और स्वयं सहायता समूह काम करने लगे हैं। कहा कि प्रवासी श्रमिकों की स्किल मैपिंग कराई जा रही है। इनमें वे श्रमिक जो बागवानी में जानकारी रखते हैं। उनको इस नर्सरी से जोड़ा जाएगा।

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